दोस्ती में आया ब्रांड का नॉइज़
तुमसे दोस्ती करना तो बहुत पहले से चाहती थी.लेकिन पापा ने मन कर दिया.सालों इंतज़ार के बाद आखिर वो दिन आया.जब मेरी और तुम्हारी पहली मुलाकात हुई.देखते ही तुमको मन में पहला ख्याल आया की बस अब कुछ नहीं चाहिए.मेरा पहला दिन तो सिर्फ तुम्हारे बारे में जान्ने में लग गया.फिर कॉलेज का दूसरा दिन आया जब मैंने तुम्हारे साथ क्लास में एंटरी ली,तुम्हे मेरे साथ देख मेर्री सारी दोस्त तुम्हारे बारे में पूछने लगी और पुचा इसका नंबर क्या है.मिने भी फ्लौंट करते हुए नंबर दे दिया .तुम्हारे साथ बिताये हर दिन मुझे याद है.चाहे वो रात में फेसबुक पर चैटिंग करते हुए गाना सुनना हो,या फिर बर्थडे होने पर 12 बजे का इंतज़ार करना हो.या तुम्हारे लिए कोई कलर चुनना हो.तुम्हारे किसी बात पर साइलेंट हो जाने पर तुम्हे जनरल करना हो.या फिर तुम्हारे साथ सेल्फी का मज़ा हो.मेरे हमेशा गुस्सा होने पर मुझे एक क्यूट सी स्माइलीभेज कर मुझे मन्ना हो.पर न जाने कुछ दिनों से क्या हो गया है तुम्हे.कुछ बदल से गए हो ठीक से बाते भी नि होती है.कुछ नेटवर्क प्रॉब्लम तो कभी स्विच ऑफ जब भी जानने की कोशिश की तो 'नो रिप्लाई' मिला.मैंने सोचा हो सकता है को इंटरनल प्रॉब्लम हो.एक दिन मैंने देखा की सुबह तो तुम एक दम चार्ज थे,ये अचानक इतनी जल्दी लो कैसे हो गए.तब याद आया की कॉलेज आते वक़्त तुम गिर गए थे.तब मैंने पापा को बताया की तुम कुछ सही से वर्क नहीं कर रहे हो.मैं भी काफी दिन से नोटिस कर रही हूँ, की तुम्हारे चेहरे की स्क्रीन पर कुह अजीब सी लाइन बन गई है.साथ ही साथ तुम्हारा साउंड सिस्टम भी ख़राब चल रहा है.बात करने पर कुछ कुछ साफ सुनाई नहीं देता और कॉल कट हो जाती है.लगता है शायद किस्मत को हमारा साथ नहीं भा रहा था.इतने दिनों से जो हमारे कम्युनिकेशन में नॉइज़ चल रहा थ.लेकिन नॉइज़ तब जादा हो गया जब उस दिन कॉलेज से लौटते वक़्त जब मेरे हाथ से तुम्हारा साथ छुट गया और तुम पूरी तरह से टूट गए.तुम्हारे चेहरे की स्क्रीन पर क्रेकक्स अ गए थे,और तुम्हारी पूरी बैटरी खतम हो चुकी थी.बेहोश हो कर तुम स्विच ऑफ गए .तुम्हारी इस हालत से घबराहट में दर के साथ मैं घर पोह्ची.पाप को सब बताया .पापा की शांति और मेरी तरह देखती उनकी ऑंखें उनका गुस्सा साफ़ ज़ाहिर कर रही थी.खैर उन्होंने अपना गुस्सा साइड और हम दोनों तुम्हे ठीक करवाने गए.काफी ज़द्दो ज़ेहेद के बाद भीं तुम सही नहीं हुए.आखिर कार मुझे तुम्हे किसी और के साथ रेप्लास करना पड़ा.सोचा की तुम्हारी ही केटेगरी का कोई दोस्त बनाउंगीलेकिन शायद किस्मत को ये मंज़ूर नहीं या फिर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी की मेरी दोस्ती सैमसंग से से सीधे'' सोनी क्स्पेरिया '' से करा दी.अब जब ब्रांड सोनी का हो और फेअतुरेस में जब ''वात्सप्प और हाईक ''जैसे मैसेंजर का साथ हो तो हमारी दोस्ती में नॉइज़ का होना तो लाज़मी है यार.मुझे पता है मेरे दोस्त ''सैमसंग वेव २'' तुम यही सोच रहे होगे ''दोस्त दोस्त न रहा ,प्यार प्यार न रहा '' मगर जब मिले सैमसंग की जगह क्स्पेरिया का साथ तो क्यूँ न छूट जाए तुम्हारा हाथ.''
तुमसे दोस्ती करना तो बहुत पहले से चाहती थी.लेकिन पापा ने मन कर दिया.सालों इंतज़ार के बाद आखिर वो दिन आया.जब मेरी और तुम्हारी पहली मुलाकात हुई.देखते ही तुमको मन में पहला ख्याल आया की बस अब कुछ नहीं चाहिए.मेरा पहला दिन तो सिर्फ तुम्हारे बारे में जान्ने में लग गया.फिर कॉलेज का दूसरा दिन आया जब मैंने तुम्हारे साथ क्लास में एंटरी ली,तुम्हे मेरे साथ देख मेर्री सारी दोस्त तुम्हारे बारे में पूछने लगी और पुचा इसका नंबर क्या है.मिने भी फ्लौंट करते हुए नंबर दे दिया .तुम्हारे साथ बिताये हर दिन मुझे याद है.चाहे वो रात में फेसबुक पर चैटिंग करते हुए गाना सुनना हो,या फिर बर्थडे होने पर 12 बजे का इंतज़ार करना हो.या तुम्हारे लिए कोई कलर चुनना हो.तुम्हारे किसी बात पर साइलेंट हो जाने पर तुम्हे जनरल करना हो.या फिर तुम्हारे साथ सेल्फी का मज़ा हो.मेरे हमेशा गुस्सा होने पर मुझे एक क्यूट सी स्माइलीभेज कर मुझे मन्ना हो.पर न जाने कुछ दिनों से क्या हो गया है तुम्हे.कुछ बदल से गए हो ठीक से बाते भी नि होती है.कुछ नेटवर्क प्रॉब्लम तो कभी स्विच ऑफ जब भी जानने की कोशिश की तो 'नो रिप्लाई' मिला.मैंने सोचा हो सकता है को इंटरनल प्रॉब्लम हो.एक दिन मैंने देखा की सुबह तो तुम एक दम चार्ज थे,ये अचानक इतनी जल्दी लो कैसे हो गए.तब याद आया की कॉलेज आते वक़्त तुम गिर गए थे.तब मैंने पापा को बताया की तुम कुछ सही से वर्क नहीं कर रहे हो.मैं भी काफी दिन से नोटिस कर रही हूँ, की तुम्हारे चेहरे की स्क्रीन पर कुह अजीब सी लाइन बन गई है.साथ ही साथ तुम्हारा साउंड सिस्टम भी ख़राब चल रहा है.बात करने पर कुछ कुछ साफ सुनाई नहीं देता और कॉल कट हो जाती है.लगता है शायद किस्मत को हमारा साथ नहीं भा रहा था.इतने दिनों से जो हमारे कम्युनिकेशन में नॉइज़ चल रहा थ.लेकिन नॉइज़ तब जादा हो गया जब उस दिन कॉलेज से लौटते वक़्त जब मेरे हाथ से तुम्हारा साथ छुट गया और तुम पूरी तरह से टूट गए.तुम्हारे चेहरे की स्क्रीन पर क्रेकक्स अ गए थे,और तुम्हारी पूरी बैटरी खतम हो चुकी थी.बेहोश हो कर तुम स्विच ऑफ गए .तुम्हारी इस हालत से घबराहट में दर के साथ मैं घर पोह्ची.पाप को सब बताया .पापा की शांति और मेरी तरह देखती उनकी ऑंखें उनका गुस्सा साफ़ ज़ाहिर कर रही थी.खैर उन्होंने अपना गुस्सा साइड और हम दोनों तुम्हे ठीक करवाने गए.काफी ज़द्दो ज़ेहेद के बाद भीं तुम सही नहीं हुए.आखिर कार मुझे तुम्हे किसी और के साथ रेप्लास करना पड़ा.सोचा की तुम्हारी ही केटेगरी का कोई दोस्त बनाउंगीलेकिन शायद किस्मत को ये मंज़ूर नहीं या फिर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी की मेरी दोस्ती सैमसंग से से सीधे'' सोनी क्स्पेरिया '' से करा दी.अब जब ब्रांड सोनी का हो और फेअतुरेस में जब ''वात्सप्प और हाईक ''जैसे मैसेंजर का साथ हो तो हमारी दोस्ती में नॉइज़ का होना तो लाज़मी है यार.मुझे पता है मेरे दोस्त ''सैमसंग वेव २'' तुम यही सोच रहे होगे ''दोस्त दोस्त न रहा ,प्यार प्यार न रहा '' मगर जब मिले सैमसंग की जगह क्स्पेरिया का साथ तो क्यूँ न छूट जाए तुम्हारा हाथ.''
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