छक्के छुड़ाने आई मेहेंगाई , न जाने कब जाएगी भाई
मेहेंगाई एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही लोगो के मुह से पहला शब्द यही निकलता क्या ऐसा लगता है जैसे किसी सीरियल में कोई नया मोड़ आया और हम देख नही पाये . मेहेंगाई का नाम सुनते ही लोगों का ये हाल है तो सोचिये की जब वाकई में मेहेंगाई हर चीज़ पर सास की तरह राज करती है तो बहुओं को कितनी जलन होती और परेशान होती वहीँ जब मेहेंगाई जब बॉस की तरह आर्डर देती तो वर्कर्स का क्या हाल होता . जैसे आये दिन हम टीवी में और अखबारों में देखते ही रहते है की डॉलर के मुकाबले रूपए और नीचे गिर रहा है जिससे सोने , चंडी , के भाव बढ़ गए है , खाने पीने की चीजों के दाम बढ़ गए है अब तो लगता है की कुछ दिनों में खाने पीने की चीजे छोटी - छोटी थैलियों में सुनारों की दुकानो में सोनेके भाव में मिलेगी , क्यों याद है आपको थ्री इडियट का ये डायलाग
भोजन गारंटी बिल पास होने पर नेता फूले नही समाते , अरे जब ७५ रूपए का पेट्रोल है , ५० रूपए किलो प्याज है तो ४५ रुपए लीटर दूध है तो २ रूपए का गेहूं लेकर क्या करेंगे . अरे भाई माना की गरीबों का कोई फायदा होगा पर किसानो का सारा अनाज सीधा सरकार के पास जायेगा .
मेहेंगाई से हर आदमी बेहाल है गर्मी के कारण तो लोगों का पसीना छूटता ही था पर अब चीज़ों के दाम देख कर ही पसीना निकलना शुरू होगया है सबकी यह हालत देख कर पीपली लाइव का यही गाना याद आता है “ सखी सैन्य तो खूब ही कमात है , मेहेंगाई डायन खाए जाट है .”
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